व्यापार की दुनिया में एक नया सवेरा,India-New Zealand के बीच Free Trade Agreement:
इंडिया ने विश्व व्यापार के मंच पर आज फिर एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। काफी इंतेजार करने के बाद इंडिया और न्यूज़ीलैंड ने Free Trade Agreement पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। जो दोनों देशों की आर्थिक स्थिति को एक नई ऊंचाई पर ला सकेगा। इस समझोते में न्यू ज़ीलैंड ने भारत से आने बाले 100% प्रोडक्टस पर टेक्स्ट खतम करने का निर्णय लिया है। इस डील से सिर्फ टेक्सटाइल्स, लेदर और फार्मा सेक्टर को फायदा होगा, साथ ही न्यूजीलैंड में भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए रोजगार करने के लिए नए रास्ते भी खुलेंगे। इस डील के मुख्य बिन्दु किया हैं और हमारी अर्थ व्यवस्था पर इसका असर कैसे पड़ेगा। Read Mor…….
इस ‘मेगा ट्रैड डील’ के मुख्य फायेदे किया हैं?
- भारत से आने बाले सभी प्रोडक्टस (कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते-चप्पल, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण, हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग सामान और ऑटोमोबाइल) पर न्यूज़ीलैंड ने सीमा शुल्क को 0% कर दिया है।
- न्यूज़ीलैंड ने इंडियन पेशेवरों (भारतीय आईटी इंजीनियरों, अकाउंटेंट और स्वास्थ्य कर्मियों) के लिए रास्ता साफ कर दिया है। न्यूजीलैंड ने 5,000 विशेष कार्य वीजा का कोटा तय किया है। इसके साथ ही 1,000 “वर्क एंड हॉलिडे” वीजा भी दिए जाएंगे
- भारत ने अपने किसानों की हिफ़ाज़त करते हुए अमूल जैसे स्थानीय डेयरी ब्रांडों के हित में दूध और पनीर जैसे उत्पादों को लेकर कोई डील नहीं की है।
यह समझौता दोनों देशों के बीच निवेश साझेदारी को काफी मज़बूत बनाता है। न्यूज़ीलैंड ने अगले पंद्रह वर्षों में भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को बढ़ावा देने का वादा किया है, जिससे भारत के ‘मेक इन इंडिया’ विज़न के तहत मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, सेवाओं, इनोवेशन और रोज़गार को बढ़ावा मिलेगा। भारतीय उद्यमों को भी न्यूज़ीलैंड में अपनी मौजूदगी से फ़ायदा होने और प्रशांत द्वीप समूह के बड़े बाज़ारों तक पहुँचने की उम्मीद है। और न्यूज़ीलैंड की प्रीमियम वाइन पर लगने वाली भारी ड्यूटी को अगले 10 वर्षों में धीरे-धीरे कम किया जाएगा।
हमारी अर्थ व्यवस्था पर इसका क्या असर पड़ेगा?
- ड्यूटी खत्म होने से न्यूजीलैंड के बाजार में हमारे प्रोडक्टस चीन और वियतनाम के मुकाबले सस्ता और प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। इससे हमारा व्यापार घाटा कम होगा।
- इंडिया के छोटे और मझोले उद्योग (कपड़ा और चमड़ा) बिना किसी टेक्स के अपना माल न्यूज़ीलैंड भेज सकेंगे। जिससे गाँव और कस्वों में रोजगार में बढ़ोत्तरी होगी।
- आर्थिक असर के साथ-साथ, ये डील भारत की जियो-पॉलिटिकल पकड़ को मजबूत बनाती है। न्यूजीलैंड के साथ मजबूत रिश्ते का मतलब है कि प्रशांत क्षेत्र में हमारी कनेक्टिविटी और बढ़ेगी। इससे हमारी इंडो-पैसिफिक में दबदाबा बनेगा।
भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच आर्थिक जुड़ाव में लगातार तेज़ी देखने को मिली है। 2024–25 में द्विपक्षीय माल व्यापार 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जबकि 2024 में वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार लगभग 2.4 अरब अमेरिकी डॉलर रहा; इसमें अकेले सेवाओं का व्यापार 1.24 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जिसमें यात्रा, IT और व्यावसायिक सेवाओं का प्रमुख योगदान रहा। FTA इस रिश्ते की पूरी क्षमता को उजागर करने के लिए एक स्थिर और अनुमानित ढाँचा प्रदान करता है।
Free Trade Agreement से न्यूज़ीलैंड को क्या फायदा होगा:
इस अग्रीमन्ट से इंडिया और न्यूज़ीलैंड दोनों को बराबर का मुनाफा होगा। जहां भारत को बाजार में पहुंच मिली है, वहीं न्यूजीलैंड ने भी अपने देश की अर्थव्यवस्था के लिए कई बड़े रास्ते खोले हैं।
- इंडिया विश्व का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है। इस अग्रीमन्ट के जरिए न्यूज़ीलैंड की कॉम्पनियों को भारत के 1.4 अरब लोगों तक आसान पहुँच मिल गई।
- न्यूजीलैंड एक कृषि प्रधान देश है। न्यूजीलैंड के किसानों के लिए भारत एक बहुत बड़ा बाजार है। अब टैक्स कम होने से उनके फल हर भारतीय सुपरमार्केट में दिखेंगे। न्यूजीलैंड की गुणवत्ता वाली ऊन की भारत के कपड़ा उद्योग में बहुत मांग है। इस डील से उनका ऊन निर्यात कई गुना बढ़ जाएगा।
- न्यूजीलैंड की वाइन इंडस्ट्री पूरी दुनिया में मशहूर है। भारत में अभी तक इम्पोर्टेड वाइन पर 150% टैक्स लगता है। क्या एफटीए के बाद ये टैक्स धीरे-धीरे कम होगा, जिसे न्यूजीलैंड के वाइन ब्रांड्स को भारत के लग्जरी मार्केट में एंट्री मिलेगी।
- न्यूजीलैंड अपने निर्यात के लिए बहुत हद तक चीन पर निर्भर था। भारत के साथ ये डील करके उन्हें अपने लिए एक वैकल्पिक बाजार तैयार कर लिया है, जो उनकी आर्थिक सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है।
न्यूज़ीलैंड के लिए ये एग्रीमेंट इनके किसान और सोधकर्ताओं के लिए एक बड़ा जेटपोक की तरह है। उन्हें एक ऐसा बाजार मिला है जो हर साल तेजी से बढ़ रहा है। और बदले में उन्हें भारत से सस्ता कच्चा माल और कुशल कार्यबल मिल रहा है।
निष्कर्ष:
यह डील ‘Make in India’ के लिए वैश्विक मंच पर मजबूत बनाती है। हमारे छोटे उद्योग (एमएसएमई) के लिए न्यूजीलैंड जैसा अमीर बाजार बिना किसी टैक्स के खुलना एक बड़ी उपलब्धि है। हमारे कुशल पेशेवरों के लिए नए रास्ते खुलने से देश में विदेशी मुद्रा (प्रेषण) का प्रवाह बढ़ेगा।
Timesofworld Opinion:
कुल मिलाकर, ये “मेगा ट्रेड डील” अगले दशक में दोनों देशों की जीडीपी को एक नई रफ्तार देगी। भारत अब विश्व स्तर पर अपनी साझेदारी पर व्यापार करें और अपने लोगों के फ़ायदे को ऊपर रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।